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Kaisi Thi Gamnaak Kahani | Subhash Gill

Kaisi Thi Gamnaak Kahani

कैसी थी गमनाक कहानी 
दर्द में डूबा किस्सा था -2 
जिसको सुनकर बाग़ का हर गुल -2 
खून के आंसू रोया था -2 
कैसी थी गमनाक कहानी 
मौत की वादी, गम का सूरज 
उसका यही बस रस्ता था -2 
गली गली और कूचा कूचा 
उसने सबको ढूंढा था -2 
जिसको सुनकर बाग़ का हर गुल 
खून के आंसू रोया था -2 
कैसी थी गमनाक कहानी
मेरी सूली को वो उठाकर 
कोहे कलवर चल पड़ा -2 
करब की राह में पत्थरों पर 
वो गिरता, उठता, चलता था -2 
जिसको सुनकर बाग़ का हर गुल 
खून के आंसू रोया था -2 
कैसी थी गमनाक कहानी
सब का साथी, सबका प्यारा 
आज सलीब पे तन्हा था -2 
नूर का मम्बा, नूर-ए-जहाँ को 
अंधियारों में रखा था -2 
जिसको सुनकर बाग़ का हर गुल 
खून के आंसू रोया था -2 
कैसी थी गमनाक कहानी
तीसरे दिन जब पाक मसीह ने 
कब्र का सीना फाड़ा था -2 
मौत भी ज़िन्दगी में थी बदली 
मौत के सर को कुचला था -2 
जिसको सुनकर बाग़ का हर गुल 
खून के आंसू रोया था -2 
कैसी थी गमनाक कहानी

Kaisi Thi Gamnaak Kahani

Lyrics: Rev. Hizkiel Serosh

Composed and Sung by: Pastor Subhash Gill

Music: Pastor Subhash Gill

Video Editing: Khurram Shahzad & Shamir Zeeshan

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