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Aise Imaan Ki Quvvat Khuda De | Jabran Jalil Ghauri

Aise Imaan Ki Quvvat Khuda De

ऐसे ईमान की क़ुव्वत, खुदा दे 
जो पहाड़ों, को भी हटा दे -2 
मैं ब-ज़ाहिर, महल हूँ सजाता 
रेत पे अपना, घर हूँ बनाता -2 
मेरा चट्टान पे घर तू बना दे -2 
ऐसे ईमान की क़ुव्वत, खुदा दे 
जो पहाड़ों, को भी हटा दे
कुएँ का पानी, खेंचूं कहाँ तक 
रूह की प्यास, में तड़पूं कहाँ तक -2 
आब-ए-हयात का जाम पिला दे -2 
ऐसे ईमान की क़ुव्वत, खुदा दे 
जो पहाड़ों, को भी हटा दे
ठनठनाता मैं पीतल सलीबी (गीतकार)
हूँ मोहब्बत, से मैं खाली खाली -2 
अपनी उलफ़त तू दिल में जगा दे -2 
ऐसे ईमान की क़ुव्वत, खुदा दे 
जो पहाड़ों, को भी हटा दे

Aise Imaan Ki Quvvat Khuda De | Jabran Jalil

Geet: Eiman Ki quwat

Worshiper: Jabran Jalil Ghauri

Lyrics: Pastor Inayat Daniel Saleebi

Composition: Shahbaz Ghauri


उर्दू शब्दों के अर्थ (https://www.rekhtadictionary.com/)

क़ुव्वत – शक्ति, ऊर्जा, ज़ोर, बल, सामर्थ्य, ताक़त, इंद्रिय, हिस, सहारा, मदद, दौलत, रियासत

ब-ज़ाहिर – देखने में, वास्तव में, प्रत्यक्ष स्पष्ट रूप से, बाह्यतः, बाह्य रूप से

आब-ए-हयात – अमृतजल, सुधा, अमृत

उलफ़त – प्यार, स्नेह, प्रेम, मोहब्बत, चाहत।


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