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Wednesday, July 6, 2022

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Mere Shafi Mere Hamsafar

Mere Shafi Mere Hamsafar

मेरे शाफ़ी मेरे हमसफर
मेरे दिल में तेरी ही आस है -2
मैं हूँ फूल तेरे ही बाग का
और तू मेरी ही बहार है -2
भला ये जहाँ मुझे देगा क्या
इसका हो भी लूँ तो मिलेगा क्या -2
इसका हो भी लूँ तो मिलेगा क्या
न तो जीते जी यहाँ चैन है
न तो मरने पर भी करार है -2
बड़े कशमकश के है मेरे दिन
शब-ए-गम मुझे खाने को है -2
शब-ए-गम मुझे खाने को है
आसी हूँ मैं प्रभु इस कदर
मेरी आस तेरे ही पास है -2
तेरा नाम ही मेरी जिंदगी
और कलाम ही मेरी बन्दगी -2
और कलाम ही मेरी बन्दगी
जो कि क्रूस पर से बहा दिया
झे उस लहू की तलाश है -2

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