Popular

Meri Khatir Sabki Khatir | Jakhmon Se Chhalni Jharna Lahu Ka | Gautam Kumar

Meri Khatir Sabki Khatir

जख्मों से छलनी, झरना लहू का 
तन से निकल रहा था 
चलना कितना मुश्किल था तू 
फिर भी चल रहा था -2
मेरी खातिर, सबकी खातिर -2  
दर्दों को सहकर, जख्मों को सहकर 
मुझको शिफा दे गया तू 
जिन्होंने मारा, जिन्होंने कुचला 
उनको दुआ दे गया तू -2 
तेरे लहू से, जो बह रहा था 
सब कुछ बदल रहा था 
चलना कितना मुश्किल था तू 
फिर भी चल रहा था
मेरी खातिर, सबकी खातिर -2  
कोड़े जो खाए, तूने उठाई 
सूली जो मेरी वजह से 
सबसे थी सुन्दर, सूरत वो तेरी 
बिगड़ी जो मेरी वजह से -2 
गिर भी रहा था, तू मेरी वजह से 
पर फिर संभल रहा था 
चलना कितना मुश्किल था तू 
फिर भी चल रहा था
मेरी खातिर, सबकी खातिर -2  
तेरी दया को, तेरे फज़ल को 
कैसे मैं यीशु भुला दूँ 
एहसान पूरा होगा न तेरा 
खुद को भी गर मैं मिटा दूँ -2 
तू था पवित्र, पर मेरी खातिर 
पापों में तू ढल रहा था 
चलना कितना मुश्किल था तू 
फिर भी चल रहा था
मेरी खातिर, सबकी खातिर -2  

Meri Khatir Sabki Khatir

Song: Meri Khatir

Lyrics/Comp: Brother Gautam Kumar

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular

Recommended