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Wednesday, July 6, 2022

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Yahi Kalma-E-Haq Rahe Zindagi Hai

Yahi Kalma-E-Haq Rahe Zindagi Hai

कलमा-ए-हक़ मसीह जब, दुनियां में आ गया 
सबको खुदा के नूर का जलवा, दिखा दिया 
इंसानियत का दर्स, दिया है मसीह ने 
तफ़रीक़ का पड़ा था जो, पर्दा उठा दिया 
जो था कलमा खुदा का, शक्ल-ए-इंसानी में वो आया 
था ईसा-उल-मसीह, ज़िन्दगी का बक्शिन्दा 
वो रूह-ए-क़ुद्स की कुदरत, कँवारी से हुआ पैदा 
इसी बा'इस वो रूह अल्लाह, वो फ़रज़ंद-ए-खुदा ठहरा 
यकीं के साथ, उससे अपनी सारी मुश्किलें कह दो 
सदा तैयार रहता है, तुम्हारी बात सुनने को 
दुआओं का जवाब आएगा, बेशक ये यकीं रखो 
तुम्हारी बात सुनने में, मसर्रत उसको होती है 
मुसीबत का कोई मारा हो, राह हक़ उसको होती है 
थके हारे जो दुनियां के हैं, फ़रहद उनको होती है 
दिलों पे बारे नाहक़ से, फ़राग़त उनको होती है 
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
गुनाहगार को इससे, जन्नत मिली है -2 
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
मरा जब लाज़र उसका दोस्त, उसका दिल भी भर आया 
और उसकी बहन-ओ मरियम मार्था, पर भी तरस आया 
वो उनके गम में ग़मगीं होके, उसकी कब्र पे पहुंचा 
अज़ीज़ उसको था लाज़र, इस कदर वो उस जगह रोया 
बुलंद आवाज़ से चिल्लाकर उसने, हुक्म फ़रमाया 
कफ़न में लिपटा लाज़र कब्र से, बाहर निकल आया 
ये एजाज़-ए-मसीहा था, कि मुर्दा कब्र से उठा 
ये कलाम खुदा था साथ जिसके, रूह-ए-अक़दस था 
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
गुनाहगार को इससे, जन्नत मिली है -2 
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
समंदर में फंसे शागिर्द जब, तूफ़ान था भारी 
किया साकिन समंदर और उसने, रोक दी आँधी 
मर्ज़-ए-ला-'इलाज आए थे जितने, हो गए चंगे 
गुनाहों से भी अपने-अपने सारे, पा गए माफ़ी 
ये बातें देखकर सब लोग, होके इक आवाज़ चिल्लाए 
कि ऐसी बात इससे पेशतर, देखी नहीं हमने 
हाँ… करें उस पर यकीं, 
और उससे सारी मुश्किलें कह दें  
वो है मुश्किल-कुशा, उस पर ही अपनी आरज़ू रखें
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
गुनाहगार को इससे, जन्नत मिली है -2 
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
कलाम-ए-हक़ मसीहा आए, सबको जिंदगी देने 
बक़ा देने हमेशा के लिए, कामिल ख़ुशी देने 
करें उन पर यकीं, ईमान लाए उनकी बातों पर 
रखें ईमान उन पर, और उनसे गुफ़्तुगू कीजे 
मोहब्बत उनको तुमसे है, मुसीबत उनको बतलाओ 
हर एक मुश्किल को वो आसां करेंगे, उनके पास आओ 
हाँ… गुनाहों से निज़ात, और हर मर्ज़ से वो शिफ़ा देंगे 
जो नामुमकिन है 'इशरत वो उसे, मुमकिन बना देंगे 
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
गुनाहगार को इससे, जन्नत मिली है -2 
यही कलमा-ए-हक़, रहे ज़िन्दगी है -2 
रहे ज़िन्दगी है -5

Yahi Kalma-E-Haq Rahe Zindagi Hai

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