Mere Malik Mere Khudaya | Jagjit Singh

Mere Malik Mere Khudaya

मेरे मालिक मेरे खुदाया
क्यों तूने मुझे भुलाया -2 
क्यों बदली तेरी निगाहें
क्यों सुनता नहीं सदाएँ -2 
क्यों नज़र से मुझको गिराया
क्यों तूने मुझे भुलाया 
दिन रात मैं तेरे दर पे 
फरियाद किया करता हूँ
महरूम मैं रह जाता हूँ 
मैं कुछ भी नहीं पाता हूँ
दुनियां में नहीं मेरी गिनती
मैं तो कीड़ा हूँ धरती का
तेरी धरती का
मेरे मालिक मेरे खुदाया
क्यों तूने मुझे भुलाया -2 
तू मुझसे दूर न जाना
हर गम से मुझे बचाना
दुनियां में नहीं कोई मेरा
मुझको है आसरा तेरा
मेरे लब पे सन्ना तेरी होगी
तेरा नाम सदा गूंजेगा... गूंजेगा
मेरे मालिक मेरे खुदाया
क्यों तूने मुझे भुलाया -2 

Mere Malik Mere Khudaya

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