Tujh Bin Mere Aye Masiha | Vijay Benedict

Tujh Bin Mere Aye Masiha

तुझ बिन मेरे ऐ मसीहा 
ये जीवन भी क्या है? 
जो तेरे दर पे न आए 
ये जीना भी क्या है? -2 
पापों का सागर ये कैसा 
बढ़ता ही जा रहा है -2 
ऐसी दशा से बचा कर 
नैय्या पार लगा दे -2 
तुझ बिन मेरे ऐ मसीहा…
जीवन मैं देता हूँ तुझको 
तेरा ही आस है मुझको -2 
अपने गले से लगा कर 
अपनी राह पर चला दे -2 
तुझ बिन मेरे ऐ मसीहा…
मार्ग, सत्य और जीवन 
यीशु प्रभु तू ही है -2 
तेरे उस मार्ग में हम 
चलते रहेंगे हर दम -2 
तुझ बिन मेरे ऐ मसीहा…

Tujh Bin Mere Aye Masiha | Vijay Benedict

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