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Ek Aisa Balidan Jo Duniyan Ne Dekha | Shukriya | Ranjit Abraham

Ek Aisa Balidan Jo Duniyan Ne Dekha | Shukriya | Ranjit Abraham

एक ऐसा बलिदान, जो दुनियां ने देखा 
एक ऐसा प्रेम जो स्वर्ग छोड़ आया 
दुनियां के पापों से एक ऐसी मुक्ति 
कई हज़ार सदियों ने, कभी नहीं थी देखी 
थे हैरान, उसके करम पर 
जब उसने मुर्दा जिलाया 
हुए आज़ाद उसके स्पर्श पर 
और प्रेम की नई भाषा वो सिखाया 
कैसे करूँ तेरा शुक्रिया, यीशु इस प्यार का 
तेरे चरणों के नीचे मैं आ रहा हूँ खुदा 
मेरे इस निर्बल शरीर में, आ बस जा पवित्र आत्मा 
तेरे चरणों के नीचे मैं आ रहा हूँ खुदा 
शक्ति दे, सामर्थ दे 
और फिर दे मुझको अपनी क्षमा 
इस काबिल तू मुझे योग्य बना 
भटकने न पाऊं ज़रा 
गिरि गुलगता पर, उस क्रूस को लेकर 
जा रहा मसीहा, दुःख, दर्द, ठोकर 
मुंह न खुली उसकी, जब उसे सताया 
अपनों के लिए भी बन गया वो पराया 
हुए हैरान उसके भाव से 
जब कहा ऐ पिता, इन्हें माफ़ तू करना 
कुचला सर, उस शैतान का 
और ख़रीदा मुझे अपने बलिदान से 
कैसे कहूँ तेरा शुक्रिया, यीशु इस प्यार का 
तेरे चरणों के नीचे मैं आ रहा हूँ खुदा 
मेरे इस निर्बल शरीर में, आ बस जा पवित्र आत्मा 
तेरे चरणों के नीचे मैं आ रहा हूँ खुदा 
शक्ति दे, सामर्थ दे 
और फिर दे मुझको अपनी क्षमा 
इस काबिल तू मुझे योग्य बना 
भटकने न पाऊं ज़रा

Ek Aisa Balidan Jo Duniyan Ne Dekha | Shukriya | Ranjit Abraham

Shukriya (Isaiah 53, Luke 7:11-17, Matthew 27: 27-43)

Words & Music by Ranjit Abraham

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