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Vedi Ka Angara Meri Or La | Sinhasan Par Wo Virajmaan | Ranjit Abraham

Vedi Ka Angara Meri Or La | Sinhasan Par Wo Virajmaan

सिंहासन पर वो विराजमान 
उसके वस्त्र के घेर से मन्दिर में है शान 
उड़-उड़कर गाते साराप
पवित्र यहोवा तू है सर्वदा -2 
भय भक्ति के मैं साथ, आ रहा तेरे पास 
तेरे इच्छा मुझमें पूरी होवे 
तन-मन-धन और घुटना, टेक रहा हूँ अपना 
तेरे प्यार के चादर से मुझे ओढ़ ले 
वेदी का अंगारा मेरी ओर ला, 
मेरे होंठ को छू
कर मेरे अधर्म, मेरे पाप क्षमा, 
मुझे कर क़बूल -2 
सूर्य समान मुख, उसका है प्रकाश 
प्रथम और अन्तिम जीवता, उसका है राज 
मृत्यु की कुंजी, है उसके पास 
उसके मुख से निकलती, दोधारी तलवार -2 
भय भक्ति के मैं साथ, आ रहा तेरे पास 
तेरे इच्छा मुझमें पूरी होवे 
तन-मन-धन और घुटना, टेक रहा हूँ अपना 
तेरे प्यार के चादर से मुझे ओढ़ ले 
वेदी का अंगारा मेरी ओर ला, 
मेरे होंठ को छू
कर मेरे अधर्म, मेरे पाप क्षमा, 
मुझे कर क़बूल -2

Vedi Ka Angara Meri Or La | Sinhasan Par Wo Virajmaan | Ranjit Abraham

Words & Music by Ranjit Abraham

(Based on Isaiah 6:6, Revelation 1:16)

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