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Wo Hi Rooh Aaya Hai | Ikhlaq Masih

Wo Hi Rooh Aaya Hai

कभी पानीयों पे जो जुंबिश थी 
कभी खैमों में की सुकूनत थी -2 
वो ही रूह, वो ही रूह आया है 
वो ही रूह आया है 
आज भी कल की तरह 
ये तख़्लीक़ करेगा 
पत्थर दिलों को ये बदलकर 
गोश्तीन दिल देगा 
जिस रूह को पाने की आशीष थी 
जिस रूह को पाने की ख़्वाहिश थी -2 
वो ही रूह, वो ही रूह आया है 
वो ही रूह आया है 
जीने का सलीक़ा देगा वो 
फ़तह का तरीका देगा वो 
हर बात, हर काम में 
खुद ही वसीला होगा वो 
जो रसूलों की भी तो ताकत थी 
जो उनके हाथ में कुदरत थी -2 
वो ही रूह, वो ही रूह आया है 
वो ही रूह आया है 
बाप और बेटे का रूह 
अब तो हमारे साथ है 
फज़ल और जलाल का रूह 
हमपे तो ठहरा आज है 
इस रूह में हम तो नहाएंगे 
इस रूह की बोली में गाएंगे -2 
वो ही रूह, वो ही रूह आया है 
वो ही रूह आया है 

Wo Hi Rooh Aaya Hai

Worshiper: Ikhlaq Masih

Lyrics and Composition: Pastor Joseph

New Masihi Geet

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