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Tuesday, July 5, 2022

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Duniya Ke Is Safar Me Jab Rahta

Duniya Ke Is Safar Me Jab Rahta

दुनियां के इस सफ़र में जब रहता -2
कभी मैं रोता, कभी मैं हँसता -2
लेकिन मसीह मेरे साथ साथ चलता -2
दुनियां के इस सफ़र में जब रहता -2
जीवन की यात्रा कितनी कठिन है -2 
घोर अन्धकार और भारी तूफान है -2 
पग पग में ठोकर आता ही रहता -2 
कौन है सम्भाले? और कौन है बचाता? -2 
एक ही सहारा मेरा तू मसीह है -2 
हर समय मुझ को तू थामे रहता है -2 
प्रेम और मधुर आवाज से तू कहता -2 
भूल न जाना तू, साथ जो मैं रहता -2
अंतिम समय तक साथ भी तू देता -2 
जब सब छोड़े, कभी न तू छोड़ता -2 
हमेशा उठाता, और नए बल से भरता -2 
ताकि मैं स्थिर रहूँ, यही तू चाहता -2 
हृदय की शुद्धता से जब मैं चलता हूँ -2 
हाथ मेरे शुद्ध और विवेक में निर्दोष हूँ -2 
अचानक कहाँ से दुश्मन आ पड़ता -2  
जीवन को दुःख से, निराशा से भरता -2 
इसी अनुभव से चलता रहूँगा -2 
प्यारे मसीह की ओर ताकता रहूँगा -2 
पिछली बातों को मैं दिल से अब भूलता -2 
प्रेमी प्रभु मेरे आँसू सब पोंछता -2 

Duniya Ke Is Safar Me Jab Rahta

Composed by Lazar Sen

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