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Munh Me Mitti | Sach Sach Kahta Hun | Anil Kant

Munh Me Mitti | Sach Sach Kahta Hun

सच सच कहता हूँ मैं तुमसे 
जिसकी आँख हो देख ले वो 
जिसके कान हों वो सुनले…
मुंह में मिट्टी, सांसों में धुआँ है 
मेरे शहर को ये क्या हुआ है 
है बद हवा सी, इतनी उदासी 
चारों तरफ मातम का समां है 
मुंह में मिट्टी…
इतनी चमक है, इतने सितारे 
फिर भी लाखों भूख के मारे 
बड़े बड़ों ने जेब है भर ली 
अच्छी ऊँची बातें कर ली 
जो गरीब है, बस वो मरा है 
मुंह में मिट्टी…
मिशन चाँद का बहुत जरुरी 
दुनियां में होगी मशहूरी 
देश के गौरव का है मसला 
लाख करोड़ों डॉलर खर्चा 
एक तिहाई भूखे नंगे 
दुनियां के, अपने इण्डिया में 
चाँद पे अपना गड़ा तिरंगा 
आम आदमी भूखा नंगा 
सारी दुनियां दान है देती 
लेकिन अपना नाम बड़ा है
सपनों का ये शहर है भाई 
झूठी खुशियाँ हैं बिखारायीं
ऊपर है चमकीला पोस्टर 
नीचे सोए हैं कुछ बेघर 
पोस्टर में भी खड़े हैं नंगे 
और नीचे भी पड़े हैं नंगे 
दोनों में बस इतनी दूरी 
ऊपर लालच, नीचे मज़बूरी 
मुंह में मिट्टी…
सच्ची बात जो कह दूंगा तो 
सूली पे सर मेरा होगा 
माया की नगरी है भैय्या 
यही कहो बस… सब अच्छा है…
सब अच्छा है

Munh Me Mitti | Sach Sach Kahta Hun | Anil Kant

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